
न्यू ईयर सेलिब्रेशन की चमक के पीछे पोल्ट्री फार्मों की एक डरावनी हकीकत सामने आई है। दैनिक भास्कर की जांच के मुताबिक, 50 ग्राम के चूजों को स्टेरॉयड इंजेक्शन देकर महज़ 21 दिनों में 2.5 किलो का मुर्गा बना दिया जा रहा है।
यानी जो काम प्राकृतिक तौर पर 60 दिन में होना चाहिए, उसे दवाओं के दम पर तीन हफ्तों में पूरा किया जा रहा है।
कैसे बन रहा है ‘Fast-Track मुर्गा’?
एजेंट्स का खुलासा सीधा है- बाज़ार की मांग इंतज़ार नहीं करती। न्यू ईयर पर ऑर्डर फटाफट चाहिए, इसलिए Natural Growth को Skip किया जाता है और Steroid Route अपनाया जाता है।
- चूजा: ~50 ग्राम
- अवधि: सिर्फ 21 दिन
- वजन: ~2.5 किलो
- तरीका: इंजेक्शन + दवाइयाँ
50 हजार मुर्गों की डील: Scale समझिए
जांच में सामने आया कि न्यू ईयर पर करीब 50,000 ऐसे मुर्गों की डील हुई। पटना, मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों में यह धंधा जोरों पर है—और यह सिर्फ़ एक सीज़न की कहानी नहीं।
जिम में 6 महीने लगते हैं, मुर्गे को 21 दिन— फर्क बस इतना है कि बिल इंसान की सेहत चुकाती है।
Health Alert: प्लेट में क्या जा रहा है?
डॉक्टर्स और फ़ूड सेफ्टी एक्सपर्ट्स पहले भी चेताते रहे हैं कि स्टेरॉयड-इंजेक्टेड चिकन से जुड़े जोखिम हो सकते हैं।
- Hormonal imbalance
- बच्चों और युवाओं में growth issues
- Long-term metabolic risks
न्यू ईयर की पार्टी एक रात की है, नुकसान लंबे समय का हो सकता है।

System Under Scanner: मिलीभगत की आशंका
जांच में अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई गई है।
सवाल उठता है— निरीक्षण क्यों नहीं? सैंपलिंग कितनी? कार्रवाई कहाँ? अगर नियम हैं, तो लागू कौन करेगा?
Food Safety vs Festival Demand
यह मामला सिर्फ़ चिकन का नहीं, Food Safety Governance का है। त्योहार आते हैं, मांग बढ़ती है— और कहीं न कहीं नियम पीछे छूट जाते हैं।
जब तक मांग अंधी रहेगी, सप्लाई दवाइयों पर चलेगी।
न्यू ईयर की प्लेट में परोसा जा रहा यह “फास्ट-ग्रोथ” मुर्गा एक Public Health Warning है। सेलिब्रेशन जरूरी है, लेकिन सेहत की कीमत पर नहीं।
सिर्फ बृजभूषण का दबदबा है, तो सुन लो… मेरा भी दबदबा था, है और रहेगा
